मेरा मन !

विरोध की नियमित अवहेलना विद्रोह को जन्म देती है !!!

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pushkar


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यहाँ सब बिकता है!!!

Posted On: 5 Feb, 2015  
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मस्ती मालगाड़ी में

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जिंदगी

Posted On: 4 Sep, 2014  
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मस्ती मालगाड़ी में

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हम कवि कहलाते है!

Posted On: 5 Aug, 2014  
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Others कविता मस्ती मालगाड़ी में

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अतिथी तुम आ जाना !!!

Posted On: 5 Aug, 2014  
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Others मस्ती मालगाड़ी में

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मेरा मन !

Posted On: 25 Jul, 2014  
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Others में

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मै आदमी सड़क का!!!!!!!

Posted On: 22 Jul, 2014  
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Others मेट्रो लाइफ में

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कवि की कविता हो या नदी की धारा !!

Posted On: 21 Jul, 2014  
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Others कविता में

5 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pushkar pushkar

शालिनी जी धन्यवाद अपनी राइ देने के लिए,सबसे पहले तो मई कहना चाहूँगा मैंने दोष किसी दुसरे के सर नहीं हम आम लोगो की मानसिकता को दिया है,जहा तक सोनिया गाँधी की बात है तो वो क्या है ये छुपी नहीं है,,,,,रही बात राजनीती की तो कोई पागल ही होगा जो लोकतंत्र में खुद को एक जिम्मेवार नागरिक समझे और राजनितिक हालत से परहेज रखे. राजनीती में जो लोग है उनकी पवित्रता पर संदेह करके मैंने कोई पाप तो नही किया?वैसे बबूल के पेर पर आम नहीं फलता.......गाँधी का नाम अपने नाम से जोरकर कोई महात्मा नहीं हो जाता है न?भक्ति की शक्ति तो मुझमे है नहीं जो आख मूंद कर सोनिया मत जय करता रहू रही बात कीमत चुकाने की तो जिस धरती पर वो जन्म ली थी उस समाज में सबंध की परिभाषा समय के साथ बदल जाता है.ज्यादा क्या कहू इसरो को अगर समझो तो राज को राज ही रहने दो धन्यवाद

के द्वारा: pushkar pushkar

के द्वारा: pushkar pushkar

आदरणीय पुष्कर जी, सादर ! बहुत अच्छी भावनाएं ! मेरी तो धारणा है कि हम जीवन से हैं, जीवन हम से है ! और हम हैं ................. . ""हम हैं पवन, गगन भी हम हैं, दिनकर कि किरणें हम हैं ! हमीं सृष्टि हैं, हम समष्टि हैं, सब में लय हम ही हम हैं !!" . मानव तो अमर है. प्रकृति ने तो उसे अपना प्रतिरूप गढ़ने की क्षमता दी है ! स्वयं का प्रतिरूप. अपनी आत्मा उसमें स्थानांतरित कर दे ! अपना प्रतिरूप स्वयं बना ले, संतान के रूप में ! जब तक उसका शारीर जर्जरावास्था में पहुंचे तबतक उसका प्रतिरूप उसके बराबर तैया हो जाए, और उसके अधूरे सपनों को पूरा करने में लग जाय ! अब अगर हमारे कोई सपने ही नहीं हैं, जीवन का कोई उद्देश्य ही नहीं है, कोई लक्ष्य ही नहीं है, या आप अपने प्रतिरूप को अपने अनुकूल नहीं बना सके तो ............... सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

के द्वारा: pushkar pushkar

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के द्वारा: pushkar pushkar

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